Saturday, December 17, 2011

जनता कभी प्राथमिकता रही ही नहीं है....


एक बार फिर देश के तथाकथित युवराज को याद आ गया है कि वो हमारे सिपाही है। पिछली १३ तारीख से जो परेड शुरू हुई वो आज अकबरपुर में जाकर समाप्त हुई। १३ तारीख से लेकर १७ दिसंबर तक राहुल लगातर दौड़ते रहे। पांच दिन में राहुल ने कुछ बेहद गिने-चुने वाक्य कहे.....एक नजर १-विपक्षी पार्टी अर्थात् बीजेपी ने शाइनिंग इंडिया का नारा दिया था लेकिन शाइन कहां हुआ? उनके घरों में ,उनके बैंक-बैलेंस में और आपको क्या मिला कुछ नहीं। 
२-विपक्ष कहता है कि मैं आपके बीच आता हूं..खाता हूं....सोता हूं,ये नाटक है। पर ये नाटक नहीं है मैं पहले यूपी का हूं और आपके बीच में आकर आपके दुखों को आपकी तकलीफों को जानने की कोशिश करता हूं...क्योंकि एसी के कमरों में बैठकर बात करने और वादा करने से कुछ होने वाला नहीं है।।।। 
३-आपको बदालव चाहिए था इसलिए आपने बीएसपी को चुना पर हुआ क्या...आप और पीछे हो गए, इस बार कांग्रेस को वोट दीजिए,सरकार बनाइए फिर देखिएगा कि कैसे ५ सालों में यूपी बाकी के राज्यों के लोगों को नोकरी देने लायक हो जाता है...। ४-यूपी में जो हाथी बैठा है वो आपका सारा पैसा खा जा रहा...जो सुविधाएं केंद्र आपको भेजता है वो इस हाथी के पेट में चला जाता है। आमतौर पर हाथी घास खाता है लेकिन ये हाथी पैसा खाता है। ५-मैं कुछ दिन पहले एक जगह से गुजर रहा था वहां अस्पताल की पुताई हो रही थी। मैंने पूछा भइया ये क्यों? बोला सीएम आने वाली हैं इसलिए। अंदर जाकर देखा तो वहां न तो कोई डॉक्टर था और न ही मरीज कुत्ते घूम रहे थे। 
६-हमने विश्व की सबसे बड़ी मदद योजना बनाई। मनरेगा से आजतक जितने गरीबों को फायदा मिला है उतना किसी से नहीं लेकिन आपकी सीएम कहती हैं ये बेकार योजना है क्योकि इससे किसी को कोई लाभ नहीं हुआ। 
७-यूपी में ६ साल के बच्चे को भी पता है कि यहां नौकरी नहीं है....
८-आप कांग्रेस शासित प्रदेशों में जाकर देखिए विकास क्या होता है। विश्व में लोगहैदराबाद को जानते हैं पर यूपी को नहीं। ९-हम जाति,धर्म और संप्रदाय की राजनीति नहीं करते। हम सभी को एक समान मानकर चलते हैं.....। १०-उठो जागो और बदलो यूपी को....। 
११-यूपी के युवा में वो क्षमता है जो यूपी का भविष्य बदल सकता है...और जब तक युवा सामने नहीं आएगा यूपी नहीं बदलेगा। १२-केंद्र ने जो पैसे भेजे थे वो नसीमुद्दीन के बेटों के लिए नहीं आपके बच्चों के लिए थे..
१३-हम विकास की बात करते हैं... १४-भइया...शांत हो जाइए..भइया 
राहुल गांधी के ५ दिवसीय ६ जिलों के दौरा का यही सार है। १३ दिसंबर को भीमनगर के बबराल पहुंचे...और कहा कि मैं अपने सहयोगियों से थोड़ा नाराज हूं क्योकि वो आपसे बहुत कम मिलते हैं...लेकिन मैं सबसे पहले यूपी का हूं इसलिए आपके बीच आना और आपके बारे में,आपके दुखों के बारे में जानना मेरा फर्ज है....। उसी दिन भागे-भागे बदायूं गए जहां सहसवान,बिलसी और बीसौली क्षेत्रों में जनता को लुभाने का प्रयास किया। 
१४ तारीख का दिन भी बदायूं के ही नाम रहा..खदर चौक और दातागंज में सभाएं की..और फिर शाहजहांपुर पहुंचे। शाहजहांपुर में बैठक को संकुचित करना पड़ा क्योंकि काले धन के मुद्दे पर संसद में पहुंचना था.. खैर अगले दिन राहुल ने फिर उसी जगह से अपनी रैली-जनसभा का आगाज किया और पहुंच गए..तिलहर। तिलहर के बाद काठ और फिर जलालबाद जाकर उन्होंने शाहजहांपुर का कोर्स पूरा किया। फर्रूखाबाद भी गए और काइमगंज जाकर जनसभा को संबोधित किया। 
अगली सुबह फर्रूखाबाद और जहानागंज के नाम रही। कन्नौज भी गए और छिबरामऊ में जनसभा की और आज कन्नौज के तिरवा से औरैय्या के बिधुना और फिर अंत में कानपुर देहात के अकबरपुर में समाप्त हुआ। राहुल गांधी ने सभी ६ जिलों नें यही पंक्तियां दोहराई हैं..और अपने चाटुकारों की झूठी तालियों से खुद को कृतार्थ किया है। बेशक राहुल को सुनने लोगों को भीड़ जुटी लेकिन भीड़ तो एक मदारी भी जुटालेता है। और यूपी में गरीबी और हीनता का भाव इस कदर हावी है कि अगर कोई भी ऐसा आ जाए जो उनसे ऊपर के वर्ग का हो तो वो उसे देखने पहुंच जाते हैं..कि फलां कैसा दिखता होगा..कैसा पहनता होगा..कैसे हंसता होगा...। 
लेकिन असल मुद्दा तो ये है कि राहुल के भाषणों में कउछ भी ऐसा नहीं था जो आम जनता आश्वस्त कर पाता कि फलां आदमी मेरे लिए अच्छे की सोच रकता है। उनके बयानों पर गौर करें तो केवल एक ही बात उभरकर सामने आती है कि राहुल केवल दूसरी पार्टयों में ऐब ही दिखाते रह गए और हो भी क्या सकता था क्योंकि खुद की पार्टी ने ऐसा कुछ किया ही नहीं है जिसे दिखाया या सुनाया जा सके सिवाह महंगाई और घोटालों के। राहुल के दौरे चुनावी दगंल में क्या मंगल कर पाएंगे ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन एक बात तो तय हो गई  कि चाहे कोई खुद को सिपाही बता ले या सेवक...मकसद सबका एक ही है दूसरे को नीचा बताकर खुद को ऊंचा दिखाना और रही बात जनता की तो न तो वो कभी प्राथमिकता रही है और ना ही रहेगी। 

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