Thursday, September 22, 2011

जहां लड़ना तो दूर,आप वि‍रोध भी नहीं कर सकते

....और एक दि‍न दादी ने मुझे पास बि‍ठाकर धीरे से कहा कि‍, अब पापा के साथ रहने का तरीका बदल दो, बड़ी हो गई हो। मां नहीं थीं तो दादी पर ही ये जि‍म्‍मेदारी थी कि‍ वो मुझे वो सब कुछ बताए्ं जो एक मां अपनी बेटी को बताती है। लेकि‍न वाकई उस वक्‍त ये समझ नहीं आया कि‍ दादी मुझे पापा से दूर रहने को क्‍यों कह रही हैं।
दूर रहने का मतलब बस इतना था कि‍ अब मुझे उनकी गोद में नहीं चढ़ना था, उनके साथ नहीं सोना था और वो सारे आचरण करने थे जो अमूमन एक बच्‍ची, लड़की हो जाने के बाद करती है। उस वक्‍त दादी मुझे कि‍सी दुश्‍मन से कम नहीं लगती थी..लेकि‍न समय के साथ समझ आया कि‍ वो मुझे वही सब सीखा रही थीं, जो उन्‍होंने खुद कि‍या था।
टीनेज आते आते लड़की को घर में बि‍लकुल अलग तरीके से ट्रीट कि‍या जाने लगता है। कल तक भाई और उसके दोस्‍तों के साथ खेलने वाली लड़की, एक वक्‍त बाद उनके सामने जाने से पहले अपनी चुन्‍नी को सलीके से पि‍नअप करके जाने लगती है। अगर वहां खड़े होकर वो हंस दे, तो मां को पसंद नहीं आता....ऐसी बहुत सी बातें उसके जीवन में होने लगती हैं जो उसे उसके लड़की होने का एहसास कराती हैं।
घरवाले तो एकबारगी भूल भी जाएं कि‍ उनकी लाडो बड़ी हो गई है लेकि‍न बाहर वाले कभी नहीं भूलते और ना तो उसे ही भूलने देते हैं।
कॉलोनी की औरतों को इस बात की टेंशन रहती है कि‍ कैसे कि‍सी की लड़की जिंस पहन सकती है या कोई और स्‍टाइलि‍श ड्रेस, जबकि‍ उनकी लड़की सूट पहनती है। मुंह पर तो भले कुछ ना कहें लेकि‍न कि‍सी बहाने से आपके घर पहुंच जाएंगी और आपके घरवालों को तरह-तरह के कि‍स्‍से सुनाकर इतना भ्रमि‍त कर देंगी कि‍ एक बार को घरवाले भी सूट पहनने की सलाह दे ही देगें।
घर और कॉलोनी से बाहर नि‍कलकर ही असली परीक्षा शुरू होती है.. कयोंकि‍ अब तक तो जाने-पहचाने चेहरे ही आपको ये एहसास कराते हैं लेकि‍न घर से बाहर नि‍कलते ही हर नजर आपकेा इस बात का एहसास कराती है कि‍ अब आप कुछ अलग हो गईं हैं..कोई भी लड़का आपको कुछ भी बोल सकता है और मजबूरन आपको उसकी बकवास सुननी ही पड़ती है.. मजबूरी है। खासकर छोटे शहरों में...........। छोटे शहर का प्रयोग लखनऊ के लि‍ए कर रही हूं। हालांकि‍ कहने को तो प्रदेश की राजधानी लखनऊ दि‍न-दुनी रात चौगुनी तरक्‍की कर रहा है, लेकि‍न फि‍र भी.....छोटा शहर ही कहूंगी।
दि‍ल्‍ली में कम से कम घर से लेकर बाहरी परि‍चि‍त भी आपको यही कहते हैं कि‍ कोई बद्तमीजी करे जो सुनना मत.. जवाब दे देना और वो भी बि‍ना डरे। लेकि‍न लखनऊ के लि‍ए वही घरवाले और बाहर वाले कहते हैं कि‍ कुछ कहना मत.. सुन लेना। बात बढ़ाने का क्‍या फायदा...। यानि‍ की घर से ही आपको सहने के लि‍ए जोर दि‍या जाता है..;
लेकि‍न इसे घर वालों का डर ही कहेंगे जो वो ऐसा कहने को मजबूर हैं...। आज ही स्‍कूटर इंडि‍या से बस में बैठी..एक लड़का साथ की सीट पर आकर बैठ गया जबि‍क पूरी बस खाली थी। एक बात और लखनऊ की बसों में ना तो लेडि‍ज़ सीट का प्रावधान है और ना तो जरूरतमंद को सीट देने का... फि‍र भी ये तहजीब का शहर है।
रास्‍तेभर वो लड़का कुछ कुछ बोलता रहा.....कभी अपने दोस्‍त को फोन पर कहता कि‍ यार माल के साथ बैठा हूं तो कभी कुछ। बापू भवन उतरने लगी तो अनायास ही खचाखच भरी बस में मेरे लि‍ए जगह बनाने लगा कि‍ मैं बि‍ना कि‍सी से धक्का खाए आराम से उतर जाऊं। खैर बस से उतरी और जैसे ही चलने को हुइ उसने कहा कि‍ मैं तुम्‍हारे लि‍ए यहां तक आया हूं वरना मेरा स्‍टॉप तो बहुत पहले ही आ गया था....। गुस्‍सा आया और चीख पड़ी...हालांकि‍ वो डर गया और उल्‍टे पैर हो गया लेकि‍न उसके कई घण्‍टों तक मैं नॉर्मल नहीं हो सकी। कहने को तो 100 नम्‍बर है लेकि‍न क्‍या ये संभव है कि‍ कोई तब तक खड़ा रहे जब तक पुलि‍स आए....नहीं। कि‍सी शहर वि‍शेष का पक्ष्‍ा नहीं ले रही लेकि‍न फि‍र भी दि‍ल्‍ली में वि‍रोध करने का साहस आप कर सकते हैं लेकि‍न यहां नहीं।
पूरी घटना के बाद ऑफि‍स पहुंची और जाकर सबको बताया, साथ ही ये फैसला भी कि‍ अब मैं स्‍कूटी से आउंगी ताकि   थोड़ा सेफ रहूं.... इस पर मेरी एक कूलीग ने बताया कि‍ अगर मैं ऐसा सोच रही हूं तो भ जाउं। क्‍योंकि‍ पि‍छले महीने ही कछ लड़के रास्‍ते में उसकी स्‍कूटी को धक्‍का मारकर इसलि‍ए चले गए कयोंकि‍ उसने उन्‍हें नाम नही बताया था। इस के बाद वो दो महीने तक अस्‍पताल में पड़ी रही। घर लौटी और सबकुछ बताया तो दादी मुझ पर ही नाराज़ होने लगी...जैसे मैं ही कुछ गलत करके आई हूं। लेकि‍न उनका डर भी अपनी जगह सही ही थ, कहीं न कहीं ये डर मेरे मन में भी है। तभी कल दूसरे रूट से जाने का फैसला कर रही हूं लेकि‍न साथ में ये भी सोच रही हूं कि‍ अगर प्रदेश की राजधानी का ये हाल है तो उन दूर-दराज़ के इलाकों का क्‍या हाल होगा जहां...ना तो कोई कम्‍यूनि‍केशन सुवि‍धा है और ना ही प्रशासनि‍क सेवा। ऐसे में महि‍ला सशक्‍ति‍करण की बात करना कि‍तना सही होगा जबकि छोटे शहरों में महि‍लाओं के पास वि‍रोध करने का भी हक़ नही है।

7 comments:

चंदन कुमार मिश्र said...

ओह! तो इन दुष्टों ने ऐसी हरकत की। अब क्या कहें इसपर। तहजीब के शहर में ऐसी हरकत करते लड़कों ने और मर्दों ने तो डरा दिया है सबको। हालत बुरी है और मायावती तो वहीं रहती हैं। 100 हो या 100000 फर्क नहीं पड़ता शायद। …दादी का डर…हमेशा समाज को ऐसे ही रहने देने जैसा है…विरोध आवश्यक है…पुरातनपंथी नजरिया बदलना होगा, कम से कम उन्हें नहीं, तो आपको।

Atul Shrivastava said...

तकरीबन हर शहर का यही हाल है।
लडकियों पर फब्तियां कसना मानों फैशन हो गया है।
आपने बेहतर तरीके से एक लडकी की...एक युवती की पीडा को उजागर किया है।
जो भी हो...इस तरह की घटनाओं का विरोध किया जाना चाहिए.....चुप रहने से सामने वाले के हौसले और बुलंद होंगे।

JANSAMVAD said...

भूमिका जी इसे ही कम्युनिकेसन गैप बोलते हैं
इसके लिए जरूरी हैं की लडकों और लड़कियों के बीच एक बेहतरीन इन्तरेक्सन बने
और दुनिया का कोई मर्द लाख कहे ये काम सब करते हैं १०० नहीं तो ५ %
और इससे मैं भी जुदा नहीं हूँ और वो भी जुदा नहीं हैं जो मंचों से नारी सशक्तिकरण के भाषण
देते हैं

jit05yadav said...

आपकी परिचय पत्रिका पढने के बाद मुझे ऐसा लग रहा है कि अभी तक आप दिल्ली का अनाज उठा रही थी. तो आप में दिल्ली वालों से निपटने की ऊर्जा थी. अब आप लखनऊ पहुँच गयी है तो कम से कम कुछ दिन तक लखनऊ का अनाज तो उठाइये बाद में ताकत आ जायेगी. वैसे मुझे पता नहीं था कि लखनऊ ऐसा शहर है.

Anonymous said...

heya battkuchni.blogspot.com owner discovered your site via search engine but it was hard to find and I see you could have more visitors because there are not so many comments yet. I have found website which offer to dramatically increase traffic to your site http://xrumerservice.org they claim they managed to get close to 1000 visitors/day using their services you could also get lot more targeted traffic from search engines as you have now. I used their services and got significantly more visitors to my site. Hope this helps :) They offer keyword service bad seo backlinks backlink watch Take care. steve

Anonymous said...

gday battkuchni.blogspot.com admin found your website via yahoo but it was hard to find and I see you could have more visitors because there are not so many comments yet. I have found website which offer to dramatically increase traffic to your site http://xrumerservice.org they claim they managed to get close to 1000 visitors/day using their services you could also get lot more targeted traffic from search engines as you have now. I used their services and got significantly more visitors to my blog. Hope this helps :) They offer google backlink best seo company backlink service backlinks check Take care. Jay

Anonymous said...

battkuchni.blogspot.com previous मैं अस्पताल के लिए हर दिन आगे और पीछे चला गया जब तक वह घर आया था

Popular Posts