Wednesday, May 09, 2012

दस साल से काम कर रही संस्‍थाओं के मुंह पर करारा तमाचा है सत्‍यमेव जयते

महाभारत और रामायण के बाद शायद यह पहला शो होगा जि‍सने रवि‍वार के इंतजार को और बढ़ा दि‍या है। लेकि‍न खास बात यह है कि‍ अभी शो शुरू हुए महज चार दि‍न हुए हैं लेकि‍न बातें कुछ इस तरह की जा रही हैं जैसे कि‍तना पुराना कार्यक्रम हो। बातें करने वालों में आमि‍र के समर्थक ज्‍यादा हैं..कार्यक्रम की ऑफि‍शि‍यल साइट का बैठ जाना इसका स्‍पष्‍ट प्रमाण है..। शो पसंद करने की हजार वजहें हैं.. लेकि‍न आलोचकों के पास शायद केवल एक।
तसलीमा नसरीन से लेकर तमाम समाज सेवी संस्‍थाओं की तथाकथि‍क ब्रांडेड समाज सेवि‍काएं बस एक ही राग अलाप रही हैं..कि‍ आमि‍र कोई नई बात नहीं कह रहे और ना तो कोई नया काम कर रहे हैं..। ये काम हम बरसों से करते आ रहे हैं..लेकि‍न उन्‍हें सेलीब्रेटी होने की वजह से तवज्‍जो दी जा रही है। कुछ ऐसे भी हैं जि‍न्‍हें अपनी पहचान का डर सताने लगा है..अस्‍ति‍त्‍व बचाने की लड़ाई सी छि‍ड़ती दि‍खने लगी है। लेकि‍न असल में आमि‍र के शो में भी तो यही कहा जा रहा है..कि तमाम संस्‍थाएं हैं, हजारों एनजीओ हैं, सरकारी कायदे-कानून हैं फि‍र भी समाज से ये कुरीति‍यां दूर नहीं की जा सकी है..क्‍यों?  दो ही कारण हो सकते हैं या तो इन संस्‍थाओं ने दस सालों में कुछ कि‍या ही नहीं या फि‍र ये कि‍ वो लोगों की नब्‍ज ही पकड़ पाए, जि‍ससे समाज में अलख जगा सकें। आमि‍र ने अपने शो की शुरूआत में ही यह कह दि‍या था कि‍ शो से हम कि‍सी सामाजि‍क कुप्रथा को दूर कर पाएंगे या नहीं ये नहीं कहा जा सकता लेकि‍न हमारा मकसद इस तथाकथि‍त सभ्‍य समाज की परतों में छि‍पी कुप्रथाओं को सामने लाना है.. और वाकई इस कार्यक्रम ने यह काम कि‍या भी है। आमि‍र के शो के लि‍ए क्रि‍केट एक्‍सपर्ट हर्ष भोगले का एक ट्वीट था कि‍ आमि‍र वो काम कर रहे हैं जि‍सके बारे में हम केवल बातें करते हैं..और ये काफी हद तक सही भी है। आज आमि‍र राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री से मुलाकात करेंगे। औरों की तरह अपने कि‍सी एनजीओ या संस्‍था के लि‍ए चंदा मांगने के लि‍ए नहीं और ना ही खुद को सम्‍मानि‍त कि‍ए जाने की सि‍फारि‍श करने के लि‍ए..बल्‍कि राज्‍य में भ्रूण हत्‍या के लि‍ए कारगर कदम उठाने के लि‍ए। इलाहाबाद में स्‍वास्‍थ्‍य वि‍भाग के अधि‍कारि‍यों ने भी अच्‍छा कदम उठाया है और छापेमारी में कुछ डॉक्‍अरों का पर्दाफाश कि‍या है। अगर महज चार दि‍नों में ये शो इतना असर डाल रहा है जो बच्‍चि‍यों के तथाकथि‍त संरक्षक दस सालों में नहीं कर पाए तो क्‍यों न आमि‍र की सराहना की जाए..क्‍यों न बात सुनी जाए और क्‍यों न उन्‍हें इन ठेकेदारों से ज्‍यादा महत्‍व दि‍या जाए..। 

3 comments:

मनोज कुमार said...

आपका आलेख बहुत अच्छा और विचारोत्तेजक है।

रविकर फैजाबादी said...

बढ़िया विश्लेषण ।

जोरदार शुरुवात ।

बधाई ।

उम्मीद जगाई ।।

Rahul Singh said...

ब्रांड इमेज का सकारात्‍मक उपयो्ग.

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